A Hindi Poem Which Will take You Back To Your Childhood!

I wrote this poem on the joys of being a child, in August 2012 inspired by the antics of my nephew. आज मुझे रोको मत , मुझे बचपन दोहराने दो. बारिश की बूंदों में आज घुल जाने दो. साफ़ कपड़ों में वो बात कहाँ आज इन्हें दाग से सजाने दो आज मुझे रोको मत , मुझे…